भोपाल, मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री बालेन्दु शुक्ला करीब 11 साल बाद कांग्रेस में वापिस लौट आए हैं। माधवराव सिंधिया के बालसखा के रूप में पहचाने जाने वाले बालेन्दु शुक्ला ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से अनबन के बाद कांग्रेस छोड़ दी थी। उनके आने से ग्वालियर में कांग्रेस को ब्राह्मण चेहरा मिल गया है।
बालेन्दु शुक्ला ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में माधवराव सिंधिया के साथ पढ़ते थे। इनकी दोस्ती माधवराव सिंधिया की अंतिम सांस तक चली। माधवराव के रहते बालेन्दु शुक्ला की तूती बोलती थी। ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस में सिंधिया गुट का नेतृत्व बालेन्दु शुक्ला ही करते थे। सिंधिया के निधन के बाद उनकी पटरी ज्योतिरादित्य से नहीं बैठी। कांग्रेस के बगावत करके शुक्ला पहले बसपा में गए और बाद में भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा ने उन्हें निगम अध्यक्ष बनाकर मंत्री पद का दर्जा तो दिया लेकिन नेता के रूप में कभी स्वीकार नहीं किया। पिछले 2 साल से वे कांग्रेस में वापिस आना चाहते थे, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें कांग्रेस में नहीं आने दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से चर्चा के बाद बालेन्दु शुक्ल ने गुरूवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर कांग्रेस की सदस्यता ले ली है।
बालेन्दु शुक्ला की करीब 11 साल बाद कांग्रेस में घर वापसी
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