नई दिल्ली,पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि देश में रोजगार पैदा होने के बजाय रोजगार के नुकसान वाली वृद्धि की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण ऋणग्रस्तता और शहरी अव्यवस्था के चलते आकांक्षी युवाओं में असंतोष पैदा हो रहा है। सिंह ने दिल्ली स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में आयोजित सम्मेलन में कहा, ‘कृषि क्षेत्र का बढ़ता संकट, रोजगार के कम होते अवसर, पर्यावरण में आती गिरावट और इससे भी ऊपर विभाजनकारी ताकतों के कार्यरत रहने से राष्ट्र के समक्ष चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।’
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि किसानों द्वारा आत्महत्या किया जाना और बारबार होने वाले किसानों के आंदोलन से हमारी अर्थव्यवस्था में व्याप्त ढांचागत असंतुलन के बारे में पता चलता है। इस समस्या के निराकरण के लिए गंभीरता के साथ विश्लेषण करने और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब तक जो रोजगारविहीन वृद्धि थी (यानी रोजगार पैदा नहीं करने वाली), वह अब और बिगड़कर रोजगार को नुकसान पहुंचाने वाली वृद्धि बन गई है (यानी रोजगार जाने वाली)। सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास असफल रहे हैं। औद्योगिक वृद्धि दर उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही है जितनी जरूरत के मुताबिक बढ़नी चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि संपत्ति और रोजगार के अवसरों में बढ़-चढ़कर भूमिका निभाने वाले लघु और असंगठित क्षेत्र को विनाशकारी नोटबंदी और जीएसटी के लापरवाही भरे तरीके से किए गए क्रियान्वयन से भारी नुकसान हुआ।
सिंह ने कहा कि रोजगारोन्मुख उद्योग के संवर्धन के प्रयासों में जो सबसे बड़ी चिंता, उद्योगों को जिस कौशल की जरूरत है उसके और स्नातक की पढ़ाई कर निकलने वाले छात्रों के पास जो कौशल है उसके बीच रहने वाला अंतर है।
रोजगार पैदा होने के बजाय देश में रोजगार के नुकसान वाली वृद्धि की नौबत आई – मनमोहन
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