मुंबई,लगता है कि माफिया सरगना अबू सलेम भारत में नहीं रहना चाहता है. शायद यही वजह है कि उसे जेल से बाहर निकालने का एक और कानूनी दांव पेच खेला गया है. खबर है कि अबू सलेम के वकील मैनुअल लुइस फेरैरा ने लिस्बन कोर्ट में पत्र देकर अबू सलेम को पुर्तगाल में साक्ष्य देने के लिए ले जाने की अनुमति मांगी है. यह पत्र उसके वकील ने 31 मई को दिया है. मालूम हो कि अबू सलेम 1995 में बिल्डर प्रदीप जैन हत्या केस और 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों में दोषी पाया गया था, जिसके बाद उसे उम्र कैद हुई थी. सलेम की गिरफ्तारी से पहले भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण संधि हुई थी, जिसके तहत जब सलेम को भारत प्रत्यर्पित किया गया था, उस वक्त लिस्बन कोर्ट ने इसी आधार पर सलेम भारत को सौंपा कि उसे फांसी की सजा नहीं दी जाएगी. भारत सरकार सलेम को मौत की सजा या 25 साल से ज्यादा कारावास न देने के लिए राजी भी हो गई थी. लिस्बन में मौजूद सलेम के वकील मैनुअल लुइस फेरैरा की तरफ से 2014 में पुर्तगाल की प्रशासनिक कोर्ट में अपील दायर की थी. इसमें कहा गया था कि उसे वापस लिस्बन भेजा जाना चाहिए क्योंकि पुर्तगाल की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण आदेश की अवधि को समाप्त कर दिया है. हालांकि उसके बाद से यह मामला पेंडिंग था. अबू सलेम की ओर से 31 मई को कोर्ट में दायर किए गए प्रार्थना पत्र में उसे पत्र के बारे में बताया गया है जो पुर्तगाली दूतावास ने मुंबई से सटे नवी मुंबई के तलोजा जेल में उसे भेजा है. इस पत्र में एंबेसी ने विश्वास दिलाया है कि वह सलेम के प्रत्यर्पण की वैधता को लेकर काम कर रहे हैं. सलेम चाहता है कि कोर्ट पुर्तगाली विदेश मंत्रालय को निर्देश करे कि संबंधित केस से संबंधित सारे दस्तावेज कोर्ट में पेश करें. सलेम यह भी चाहता है कि कोर्ट पुर्तगाली विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय को भी निर्देश दे कि उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक रूप से समाप्ति को लागू की जाए. कोर्ट ने अबू सलेम की अपील पर भारतीय प्राधिकरणों, पुर्तगाली मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय को जवाब देने के लिए दस दिन का समय दिया है. उसके बाद जज फैसला लेंगे कि सलेम की ओर से दायल अपील पर सुनवाई करनी है या नहीं.
भारत में नहीं रहना चाहता अबू सलेम, पुर्तगाल कोर्ट में दायर की याचिका
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