नई दिल्ली,आजकल घर से पानी लेकर चलाने का चलन खत्म से हो गया हैं लोग ज्यादात्तर समय बोतलबंद पानी बाजार से खरीदकर उपयोग कर रहे है। लेकिन इन लोगों को नहीं पता नहीं एक मौत का पानी खरीद रहे है। दरअसल बाजार में बिकने वाला हर बोतलबंद पानी या ‘मिनरल वाटर’ सौ फीसदी स्वच्छ नहीं है।पिछले एक साल में बोतलबंद पानी के एक तिहाई से अधिक नमूने तय मानक पर फेल हो गए। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक,वर्ष 2016-17 के दौरान देशभर में बोतलबंद पानी के 743 नमूनों में से 224 स्वच्छ पानी के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस पर उपभोक्ता मंत्रालय ने राज्यों की मदद से 48 आपराधिक सहित कुल 131 मामले दर्ज कराए। कई कंपनियों पर सात लाख रुपये से अधिक जुर्माना भी वसूल किया गया। उपभोक्ता मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि,खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम और उसके तहत नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। इसतरह के मामलों में राज्य और केंद्र शासित क्षेत्रों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को यह परामर्श जारी करता है कि,वह शिकायतों की जांच कर कार्रवाई करे।
बोतलबंद पानी बेचने वाली कंपनियों के उत्पाद भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनिवार्य प्रमाणन के तहत भी आते हैं। इस तरह बीआईएस भी पानी की जांच करता रहता है। उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2017-18 के दौरान बीआईएस ने पानी बेचने वाली 25 कंपनियों पर छापा मारकर नमूना जमा किए। इनमें बड़ी संख्या में नमूने फेल हो गए।अदालत ने अभी तक 11 मामलों में फैसला दिया है। इनमें से दस में पानी पैक करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की गई है। भारतीय मानक ब्यूरो ने पीने योग्य स्वच्छ पानी के लिए करीब चालीस मानत तय किए हैं। कई बोतलंबद पानी में क्लोरीन और बीमारियों को न्योता देने वाली ब्रोमेट की मात्रा अधिक पाई गई। कई में अधिक पीएच और खनिज पाए गए। इनसे शरीर में कई तरह की परेशानियां पैदा होती है। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार निम्नलिखित वर्ष में लिए गए बोतलबंद पानी के नमूनों में से इतने नमूने फेल हुए।
सावधान हो जाइये बोतलबंद पानी के एक तिहाई से अधिक नमूने फेल, 131 मामले दर्ज
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