फोर्टिस ने छिपाई डेंगू की जानकारी, प्राथमिकी में जुड़ी एक और धारा

गुरुग्राम,उपचार के दौरान एक बच्ची मौत और बच्ची के परिजनों को 18 लाख रुपए का बिल थमाने वाले फोर्टिस अस्पताल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस बीच पुलिस ने फोर्टिस अस्पताल पर डेंगू का मामला छिपाने के लिए प्राथमिकी में एक और धारा जोड़ी है। पुलिस के मुताबिक फोर्टिस अस्पताल ने डेंगू की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं दी, जो कि नियमानुसार गलत है। नियमों के मुताबिक डेंगू मरीजों की जानकारी जिला प्रशासन को देनी अनिवार्य है। ऐसे में जांच रिपोर्ट के आधार पर गुरुग्राम पुलिस ने आईपीसी की धारा 188 को एफआईआर में जोड़ दिया है। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर गुरुग्राम पुलिस ने फोर्टिस अस्पताल के एक डॉक्टर विकास शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 304/2 के तहत मामला दर्ज किया था, जिस पर सरकार की काफी किरकिरी हुई। सरकार पर आरोप है कि एफआईआर में प्रबंधन को बचाया गया है, जबकि इस मामले में प्रबंधन भी बराबर का जिम्मेदार है।
इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को चिट्ठी लिखकर पुलिस के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में अस्पताल प्रबंधकों के खिलाफ मामला बनता है। उन्होंने आदेश जारी कर तुरंत प्रबंधकों के नाम भी प्राथमिकी में जोड़ने को कहा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने साथ ही कड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल की जमीन की लीज भी रद्द करने का आदेश दे दिया। इतना ही नहीं अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस भी रद्द करने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली के द्वारका निवासी जयंत सिंह की सात वर्षीय बेटी आद्या सिंह को डेंगू हो गया था। परिवार वालों ने इलाज के लिए बच्ची को फोर्टिस अस्पातल में भर्ती करवाया। लेकिन इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। हद तो तब हो गई जब अस्पताल ने बच्ची के इलाज के लिए परिजनों को 18 लाख रुपये का बिल पकड़ा दिया।

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