भोपाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जनजातीय समाज विकास में पिछड़ गया है, उसे समान स्तर पर लाने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। सामाजिक न्याय और सबको न्याय, सामाजिक समरसता के साथ जरूरी है। हमारे जनजातीय भाई-बहनों के शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक विकास के साथ जनजातीय क्षेत्र में अधोसंरचना के विकास के लिए रोडमैप बनाया गया है। जनजातीय भाई बहन आगे बढ़े इसके लिए हम हरसंभव कदम उठाएंगे, क्योंकि देश को आगे बढ़ने के लिए सबका आगे बढ़ना जरूरी है। चौहान ने जनजातीय समाज को सात गारंटियाँ देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकास की गारंटी, जन-कल्याण योजनाओं को ठीक ढंग से जनजाति भाई-बहनों तक पहुँचाने की गारंटी, शिक्षा की गारंटी, स्वास्थ्य की गारंटी, सुरक्षा की गारंटी, सम्मान की गारंटी और युवाओं को रोजगार की गारंटी देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
चौहान ने कहा कि आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा के जन्म-दिवस पर प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। “राशन आपके द्वार” जैसी कई योजनाएँ इस दिन आरंभ होंगी।
चौहान जनजातीय संग्रहालय में आयोजित “जनजातीय गौरव संवाद” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम शुभारंभ के पूर्व देश को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने वाले जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों रानी दुर्गावती, रघुनाथ शाह, शंकर शाह, बिरसा मुंडा, भीमा नायक और टंट्या मामा को नमन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान का परंपरागत नृत्य और जनजातीय रीति-रिवाज के अनुसार स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का विचार था कि दरिद्र ही हमारा नारायाण है और उसकी सेवा ही हमारी पूजा है। यह विचार प्रेरणादायी है, प्रधानमंत्री श्री मोदी भी इसी विचार के हैं। विकास की प्रक्रिया में कुछ लोग अधिक संसाधन पा गए और कुछ विकास की दौड़ में पीछे रह गए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विचार है सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास। अत: जनजातीय समाज अगर पिछड़ गया है तो उसे समान स्तर पर लाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। इस चिंता के परिणामस्वरूप ही जनजातीय विकास के लिए विभिन्न आयोगों का गठन किया गया। झाबुआ, अलीराजपुर जैसे क्षेत्रों में लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से जनजातीय भाइयों के खेतों तक पानी पहुँचाने की व्यवस्था की गई। सिंचित खेती की व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में कपिलधारा के कुएँ बनवाए गए।
चौहान ने कहा कि बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था के लिए आश्रम शालाओं, छात्रावास, हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूल आरंभ किए गए। जनजाति समाज के बच्चों में बुद्धि, प्रज्ञा, प्रतिभा सब कुछ है। इसीलिए हमारी सरकार ने शिक्षा का महाअभियान आरंभ किया। बच्चे पढ़ रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षा ही समर्थ होने की पहली सीढ़ी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री छात्र गृह योजना बनाई गई, जिससे गाँवों से शहरों में आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को कमरे का किराया देने की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई। इसके साथ ही कोचिंग के लिए भी व्यवस्था की गई है, ताकि विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयुक्त मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके। विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश होने पर विश्वविद्यालय की फीस सरकार द्वारा भरवाने की व्यवस्था भी की गई है। शहडोल और झाबुआ में इंजीनियरिंग कॉलेज आरंभ किए गए हैं।
चौहान ने कहा कि शिक्षा के इस विस्तार से चेतना आई, आंदोलन आरंभ हुए, अधिकारों की भूख जागी, युवा संगठित हुए और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने लगे। यह जागरूकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि शासकीय सेवकों ने भी जनजाति समाज की उन्नति और जागरूकता के लिए बहुत कार्य किया है। सामाजिक समरसता के ताने-बाने को बनाकर रखना हम सब का कर्त्तव्य है।
चौहान ने कहा कि विकास की दौड़ में जो पीछे और नीचे रह गए उन्हें आगे लाने के लिए मैं सब कुछ करूंगा। जन-कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुँचे यह आवश्यक है। इसे सुनिश्चित करने के लिए सीएम हेल्पलाइन, जनदर्शन, जन-सुनवाई, औचक निरीक्षण और समाधान ऑनलाइन जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। विकास हमारी प्राथमिकता है और यह थमने वाली प्रक्रिया नहीं है।
जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सम्मान और रोजगार की गारंटी
