परीक्षा के दिनों में समय का प्रबंधन कर इस प्रकार रहा जा सकता है तनाव रहित

नई दिल्ली,अगले माह से बच्चों की बोर्ड परीक्षाएं शुरु होने वाली हैं। यह समय सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं अभिभावकों के लिए भी तनावपूर्ण होता है लेकिन इस तनाव को रुटीन में थोड़ा-सा ध्‍यान रखकर कम किया जा सकता है।
इस दौरान बच्चों के खाने ओर स्वास्थ्य का विशेष ध्यान देना चाहिये। परीक्षा के समय आप अपने बच्‍चे को राहत भरा माहौल देने की कोशिश्‍ा करें। बच्‍चे को तैयारी करने पर ध्‍यान देने की हिदायत दें न कि परीक्षा में कैसा प्रदर्शन करना है।
परीक्षा के दिनों में नाश्ता करना न भूलें क्यों यह शरीर को उर्जा देने के साथ ही ताजगी भी देता है।
समय पर सोयें : परीक्षा के दिनों में हमेशा अपनी नींद पूरी करें। परीक्षा के दौरान अक्‍सर भूलनें की समस्‍या आती है, जिसकी वजह पूरी नींद नहीं लेना होता है। अभिभावक भी इस बात का खास ख्‍याल रखें कि बच्‍चे नींद लेने में कोई कोताही नहीं बरतें।
परीक्षा के समय रात में जागकर पढ़ने के दौर चाय-कॉफी का सेवन न करें। इसका असर अच्‍छा नहीं होता। लिहाजा इसे लेने से जितना बचें उतना बेहतर है।
फास्‍ट फूड बच्चों को पसंद रहता है पर परीक्षा के समय में बीमार नहीं पड़ने के लिए फास्‍टफूड से दूरी बनाकर रखें। इन्‍हें न खाने की एक वजह यह भी है कि इसे लेने के बाद आप शरीर में आलस महसूस करते हैं और पढ़ाई करने और किसी चीज को याद रखने में परेशानी होती है।
बच्चों का मनोबल बढ़ायें
परीक्षा के समय बच्चों को मानसिक संबल की बहुत जरुरत होती है। इससे उन्हें बहुत लाभ होता है। उनमें एक आत्मविश्वास पैदा होता है जिससे परीक्षा में वे अच्छे अंक लाते है। वहीं बच्चों को सहयोग करके अभिभावकों को भी ख़ुशी और आत्म सन्तुष्टि मिलती है। यह अभिभावकों का फर्ज भी होता है। परीक्षा के समय बच्चे मेहनत से पढ़ाई करते है। उन्हें मेहनत करते देख कर ख़ुशी होती है।
ऐसे समय बच्चे पर दबाव होता है। उन्हें खुद के रिज़ल्ट की तो चिंता होती ही है साथ में उन्हें माता पिता , स्कूल के टीचर की उम्मीदों को भी पूरा करना होता है। माता पिता की थोड़ी सी मदद से परीक्षा की तैयारी अच्छे से करके बच्चे अच्छे नंबर ला सकते है।
माता पिता को बच्चे की बहुत चिंता होती है। मदद करना चाहते है पर समझ नहीं आता किस प्रकार मदद करें ताकि उन्हें अच्छी सफलता मिले। माता पिता को यह भी चिंता होती है की बच्चे ने रिविज़न अच्छे से किया है या नहीं या बच्चे का साल ख़राब न हो जाये। यदि बच्चा बाहर पढ़ रहा हो तो चिंता और भी बढ़ जाती है। खासकर माँ को बच्चों के खाने पीने की चिंता ज्यादा होती है। यदि कुछ कर नहीं पाते तो मन में बहुत दुःख होता है। बच्चों को अपनी चिंता ज्यादा दिखा भी नहीं सकते क्योंकि इससे वे और दबाव में आ सकते है। यदि किसी तरह बच्चे की तकलीफ दूर कर पायें खुद का तनाव भी दूर होता है।
परीक्षा के समय बच्चों की मदद कैसे करें
परीक्षा का समय बच्चों को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है। यह समय उनके जीवन में आने वाली कड़ी और बड़ी परीक्षाओं का सामना करने के लायक विश्वास पैदा करता है। परीक्षा के तनाव को जिंदगी जीने की सीख का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए। उनकी हर छोटी से छोटी मुश्किल में आगे होकर मदद करने से वे कभी आत्म निर्भर नहीं बनेंगे। उन्हें अपनी मुश्किलों से खुद बाहर निकलना सिखायें। उन्हें रास्ता दिखाकर उस पर खुद चलना सिखायें। रास्ते की हर रूकावट दूर करके उन्हें पंगु न बनायें। यह बच्चों के विकास में बाधा बनता है।
शरीर और दिमाग का सही तरीके से काम करने के लिए पौष्टिक आहार बहुत जरुरी होता है। अतः परीक्षा शुरू होने से पहले ही बच्चों के खाने पीने में पौष्टिकता का ध्यान रखें। नाश्ते , दोपहर का खाना और रात का खाना सभी में संतुलन होना चाहिए। रात को थोड़ा हल्का खाना होना चाहिए ताकि पढाई अच्छे से हो सके। ऐसे समय जंक फूड नुकसान कर सकते है।

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