इंदौर,अपने भारी-भरकम आकार के चलते ‘आमों की मल्लिका के रूप में मशहूर ‘नूरजहां’ के चाहने वालों के लिए बुरी खबर है। इल्लियों के भीषण प्रकोप के चलते आमों की फसल बर्बाद हो गई है। अफगानिस्तानी मूल की मानी जाने वाली आम प्रजाति ‘नूरजहां’ के गिने-चुने पेड़ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर कट्ठीवाड़ा में इस प्रजाति की खेती के विशेषज्ञ इशाक मंसूरी ने बताया, इल्लियों ने अचानक हमला किया और नूरजहां के बौरों (फूलों) को फल बनने से पहले ही चट कर लिया। हाल ही में इल्लियों का इसी तरह का प्रकोप महुआ के पेड़ों पर भी देखा जा चुका है। उन्होंने बताया कि फिलहाल कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ‘नूरजहां’ के पेड़ों पर फलों का नामोनिशां बाकी नहीं रहा। ऐसा बरसों बाद हुआ है, जब दूसरी प्रजातियों के आमों के पेड़ तो फलों से लदे हैं। लेकिन नूरजहां के पेड़ों से फल गायब हैं। उन्होंने बताया कि इस बार ‘नूरजहां’ के पेड़ों पर बौरों की संख्या पहले ही कम थी। इल्लियों के कहर के बाद इसकी फसल की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई। जानकारों के मुताबिक, पिछले एक दशक के दौरान मॉनसूनी बारिश में देरी, अल्पवर्षा, अतिवर्षा और अन्य मौसमी उतार-चढ़ावों के कारण ‘नूरजहां’ के फलों का वजन लगातार घटता जा रहा है। किसी जमाने में ‘नूरजहां’ के फलों का औसत वजन 3.5 से 3.75 किलोग्राम के बीच होता था। लेकिन अब यह घटकर औसतन 2.5 किलोग्राम के आस-पास रह गया है। ‘नूरजहां’ के फलों की सीमित संख्या के कारण शौकीन लोग तब ही इनकी बुकिंग कर लेते हैं, जब ये डाल पर लटककर पक रहे होते हैं। पिछले साल मांग बढ़ने पर इसके केवल एक फल की कीमत 500 रुपए तक पहुंच गई थी।
इल्लियों के हमले में आमों की फसल को नुकसान,आमों की मल्लिका नूरजहां लापता
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