नई दिल्ली,वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक 2018 को लोकसभा में बुधवार को बिना चर्चा के ही पारित हो गया। इससे पहले विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की 99 मांगों को गिलोटिन के जरिए मंजूरी दी गई। हाल के सालों में शायद यह पहला मौका रहा, जब पूरा बजट बिना चर्चा के लोकसभा में पारित हुआ।
सदन ने ध्वनिमत से विपक्ष के विभिन्न कटौती प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया, साथ ही 21 सरकारी संशोधनों को पारित किया। इसके बाद वित्त और विनियोग विधेयक 2018 को राज्यसभा को भेजा जाएगा। चूंकि यह धन विधेयक है, ऐसे में राज्यसभा में इनके 14 दिन में मंजूर नहीं होने की स्थिति में भी इन्हें पारित माना जाएगा। इसके बाद इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
लोकसभा में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने वित्त एवं विनियोग विधेयक 2018 पेश किया। आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग, पीएनबी धोखाधड़ी मामले समेत विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच लोकसभा में वित्त एवं विनियोग विधेयक को पारित किया गया। हंगामे के बीच वित्त एवं विनियोग विधेयक पारित किए जाने के विरोध में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।
वित्त एवं विनियोग विधेयक 2018 पारित होने के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिये स्थगित कर दी। इससे पहले, सुबह बैठक शुरू होने पर हंगामा जारी रहा और कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन में हंगामे के कारण लगातार आठवें दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका। इससे पहले ही बजट सत्र के दूसरे चरण में शुरूआती सात दिन की कार्यवाही इन्हीं मुद्दों पर हंगामे की भेंट चढ़ चुकी है। हंगामे के बीच ही संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि शाम पांच बजे 2018-19 के लिए केंद्रीय बजट के संबंध में बकाया अनुदान की मांगों, वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक को लिया जाना सूचीबद्ध है। इसे पांच बजे की बजाए अब दोपहर 12 बजे ही लिया जाए।
अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री का आग्रह स्वीकार करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से सदन की बैठक बाधित हो रही है और महत्वपूर्ण वित्तीय कामकाज निपटाया जाना है। ऐसे में दोपहर 12 बजे सदन में आवश्यक कागजात रखवाने के बाद वित्तीय कामकाज को आगे बढ़ाया जाएगा और वित्त विधेयक एवं विनियोग विधेयक 2018 को लिया जाएगा।