भोपाल,इंदौर में हुए डीपीएस बस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने स्पीड गवर्नर में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नई गाइडलाइन लागू कर दी है। स्पीड गवर्नर लगाने से पहले उत्पादक, डीलर दोनों को ही विभाग के मुख्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद मुख्यालय से स्वीकृति जारी होगी। इस संबंध में जनवरी अंत में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इससे वर्तमान में जिन बसों में स्पीड गवर्नर लगे हैं, उनमें भी फिर से नए स्पीड गवर्नर लगाने होंगे। स्पीड गवर्नर को लेकर ऐसे वाहन मालिक जिन्होंने 1 अक्टूबर 2015 के पहले रजिस्ट्रेशन कराया है, उन्हें भी इस नियम का पालन करना होगा। वर्तमान में कई बस संचालक स्पीड गवर्नर को लेकर केवल कागजी कार्रवाई कर लेते थे। अब स्पीड गवर्नर निर्माता व उत्पादक के लिए परिवहन मुख्यालय स्थित कार्यालय में डाटा सेंटर बनाया जा रहा है यहां हर स्पीड गवर्नर का डाटा सेव होगा।
छेड़छाड़ करने पर कार्रवाई होगी
स्पीड गवर्नर से गड़बड़ी या छेड़छाड़ करने पर कार्रवाई की जाएगी। फिटनेस के लिए आने वाले वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर की पूरी जानकारी परिवहन विभाग के कर्मचारियों को स्कैन कर सर्वर में अपलोड करना होगी। इसके साथ ही उत्पादक, डीलर, वाहन क्रमांक, स्पीड गवर्नर की टेस्ट रिपोर्ट और उसके वाहन में लगने की तारीख भी सर्वर में दर्ज होगी। ऑनलाइन फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करते वक्त 18 बिंदुओं की जानकारी भी इसी दौरान भरना पढ़ेगी। अगर स्पीड गवर्नर की जानकारी नहीं भरी गई, तो सर्टिफिकेट का प्रिंट नहीं निकलेगा।
वाहन मालिक दिखावे के लिए लगवाते थे स्पीड गवर्नर इसलिए बदला नियम
अभी जो हाल बसों के हैं उसके मुताबिक दिखावे के लिए स्पीड गवर्नर लगा लिए जाते हैं। इधर स्पीड गवर्नर के बिना फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं निकलता है। इसे लेने के लिए वाहन मालिक दिखावे के लिए उसे लगवाते थे। जैसे कि कार्यालय के बाहर दलालों से उसे फिट कराते थे और सर्टिफिकेट मिलने के बाद उसे दलाल को वापस कर देते थे। जितने वक्त के लिए वह लगता था, उसका किराया ले लेते थे। यही कारण है कि नियम में बदलाव किया गया है।
बसों में फिर लगेंगे स्पीड गवर्नर,गाइड लाइन जारी, फिटनेस से पहले सर्वर पर अपलोड होगी जानकारी
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