चेन्नई,लगभग छह दशक के बाद रेलवे ने चेन्नई की रेल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में बन रहे परंपरागत डिब्बों को अलविदा कह दिया है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन की मौजूदगी में बने इस तरह के अंतिम कोच को रेल नेटवर्क में शामिल कर लिया गया। अब इस फैक्ट्री में परंपरागत कोच के प्लांट में भी एलएचबी कोच का ही निर्माण किया जाएगा, जो न सिर्फ यात्रा के लिहाज से आरामदेह है, बल्कि दुर्घटना होने की स्थिति में यह कोच यात्रियों की हिफाजत भी करता है। हालांकि रेलवे ने पहले से बने परंपरागत रेल कोचों को अब सुरक्षित बनाने के लिए उनकी कपलिंग को भी बदलने की कवायद शुरू की है। हालांकि अब तक जो परंपरागत कोच बने हैं, वे रेल नेटवर्क में चलते रहेंगे। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस कोच के साथ ही आईसीएफ से परंपरागत डिब्बों के निर्माण की प्रक्रिया को भी बंद कर दिया गया है। रेलवे अफसरों का कहना है कि एलएचबी कोच की लागत अधिक होती है, कोच का साइज बड़ा होता है यानी उसमें कुछ सीटें अधिक होती हैं। इसके अलावा उसका सस्पेंशन पावर भी अधिक है, जिससे रफ्तार पकड़ने पर भी डिब्बों में कंपन कम होता है, जिससे यात्रियों को कम झटके लगते हैं। आईसीएफ के महाप्रबंधक सुधांशु मणि का कहना है कि अब एलएचबी कोच निर्माण की रफ्तार को बढ़ाकर अगले साल डबल करने की तैयारी है। बीते साल जहां 388 कोचों का निर्माण हुआ, वहीं अगले साल 1050 कोच और फिर उससे आगे दो हजार कोच हर साल बनाए जाएंगे। इसके बाद टारगेट बढ़ाकर चार हजार किया जाएगा।
पुराने कोचों की विदाई की तैयारी,कोच फैक्ट्री में सिर्फ LHB डिब्बे ही बनेंगे
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