भोपाल,राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकार द्वारा दी जा रही आजीवन आवास, वेतन-भत्ते एवं अन्य सुविधाओं पर राज्य सरकार पुनर्विचार कर रही है। संभवत: कुछ सुविधाओं में कटौती की जा सकती है। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में बताया कि मंत्रियों के समान पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने के संशोधित अधिनियम में बदलाव के संबंध में पुनर्विचार जारी है। हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह की मोहलत देकर अगली सुनवाई 22 जनवरी 2018 को निर्धारित कर दी।
जनहित याचिका के विचाराधीन रहने के दौरान ही राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश वेतन-भत्ते अधिनियम में संशोधन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्रियों को मौजूद मंत्रियों के समान वेतन, भत्ते आवास की सुविधा देने का प्रावधान जोड़ दिया था। इसे लेकर विगत सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता की ओर से अलग से आवेदन पेश करके अनुचित संशोधन निरस्त करने पर बल दिया था। इसके बाद सरकार ने स्वयं हाईकोर्ट में अपनी गलती स्वीकारी और कठघरे में रखे गए संशोधित प्रावधान में आवश्यक बदलाव किए जाने के लिए समय मांग लिया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई कि उन पूर्व मुख्यमंत्रियों की सूची पेश क्यों नहीं की गई, जो अभी भी शासकीय आवासों में रह रहे हैं। याचिकाकर्ता का पूरा जोर इसी बात पर है कि हर हाल में सूची तलब करके पूर्व मुख्यमंत्रियों को शासकीय आवासों से हटाया जाए।