भोपाल, व्यापमं घोटाले में सीबीआई ने पेपर हल करने वाले और कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले करीब 348 आरोपियों की जानकारी निकाली। इनमें 90 फीसदी इंजन (पेपर हल करने वाले) और बोगी (कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले) उत्तर-प्रदेश के हैं। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में फॉर्म भरने से लेकर फीस का भुगतान करने वाले बैंक खातों तक की जानकारी दी है। पीएमटी 2012 में शामिल हुए जिन 348 इंजन-बोगी को आरोपी बनाया गया है, उन सभी के फॉर्म साइबर कैफे से भरे गए। एमपी ऑनलाइन के रिकॉर्ड से यह जानकारी निकाली गई। सीबीआई की टीम जब इन साइबर कैफे में जांच के लिए पहुंची तो एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा सामने आया। चार्जशीट में बताया गया है कि परीक्षा के लिए सक्रिय दलालों का गढ़ कानपुर शहर रहा था। इनकी अपनी पूरी एक टीम हुआ करती थी। जो इंजन-बोगी की तलाश से लेकर उनके फॉर्म भरवाने और परीक्षा में शामिल करवाने तक का काम करती थी। साइबर कैफे संचालक को दलाल आवेदकों के फोटोग्राफ, हैंडराइटिंग, फर्जी पते के दस्तावेज उपलब्ध करवाते थे।
साइबर कैफे संचालक इन दस्तावेजों को स्कैन कर फॉर्म भरता था और अपने खाते से फीस जमा करता था। बाद में दलाल अपने बैंक खाते से सभी फॉर्मों की फीस एकमुस्त देता था। फर्जीवाड़े की यह योजना इतनी सुनियोजित थी कि इंजन-बोगी अलग-अलग शहरों से होने के बाद भी एक-साथ, एक-समय और एक स्थान पर जमा होते थे, जिन्हें दलाल अपने साथ लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचता था। चार्जशीट में सीबीआई ने कानपुर के दलाल विवेक यादव, अजय यादव व अमरनाथ का हवाला देते हुए उल्लेख किया है कि इनके बैंक खातों की जानकारी से ही पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होता है। दलालों ने फॉर्म की फीस का भुगतान मुख्य रूप से एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट व डेबिट कार्ड से किया है। चार्जशीट में बताया कि दलालों ने इंजन-बोगी को साथ-साथ लाने-ले-जाने से लेकर भोपाल, इंदौर और शहडोल में परीक्षा केंद्रों के पास की होटल तक में रहने के पुख्ता इंतजाम किए थे। सीबीआई ने इन होटलों से रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं।
व्यापमं घोटाले में पेपर हल करने वाले 348 आरोपियों की जानकारी निकाली
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