इंदौर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, न्यायमूर्ति एचपी सिंह, न्यायमूर्ति राजीव दुबे, न्यायमूर्ति विजय शुक्ला और न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की बेंच ने एक फैसले में कहा है कि कांटेक्टर को काम पूरा करने के बाद भुगतान के लिए खनिज विभाग से रॉयल्टी सर्टिफिकेट लाना होगा। यह सर्टिफिकेट संबंधित विभाग को देने के बाद ही उनके फाइनल बिल का भुगतान किया जाएगा।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच ने कॉन्टेक्ट्स की याचिका पर यह सुनवाई की थी। सरकारी ठेकेदारों का कहना था कि वह बाजार से गिट्टी और मुरम खरीदते हैं। उन्हें जो बिल मिलता है, वही सर्टिफिकेट के समान होता है। उसने रॉयल्टी चुकाई या नहीं, इस पर ठेकेदार कुछ नहीं कर सकता है। इस मामले में पहले भी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला पुनः सुनवाई के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट वापस भेजा था। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की फुल बैच ने कहा कि फाइनल बिल के पहले खनिज विभाग का रॉयल्टी सर्टिफिकेट आवश्यक है। इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि इस मामले की याचिका अब सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे।
ठेकेदारों को फाइनल बिल के पहले रॉयल्टी सर्टिफिकेट पेश करना जरूरी
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