भोपाल, एनआईसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से फर्जी एंट्री करके सरकारी जमीनों को निजी लोगों के नाम करने के गोरखधंधे की जांच एसटीएफ ने शुरू कर दी है। लैंड रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर सरकारी जमीन को निजी नामों में दर्ज करने के कई मामले सामने आए हैं। यह गड़बड़ी मध्य प्रदेश के कई जिलों में की गई है। अब इस मामले की जांच शासन द्वारा एसटीएफ को दी गई है। एसटीएफ ने जांच शुरू भी कर दी है।
पिछले सालों में हुए जमीन घोटाले के कई मामले ग्वालियर के मुरार, मुरैना, नरसिंहपुर, गाडरवारा, आगर-मालवा, सहित लगभग दो दर्जन जिलों में कंप्यूटर रिकॉर्ड में हेराफेरी करके सरकारी जमीनों को निजी नामों पर करके जमीन के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करके बैंकों से बड़े पैमाने पर कर्ज लेने की शिकायतें शासन स्तर पर आई थी। यह घोटाला 2009-2010 में भू-अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण के दौरान और उसके बाद किया गया था। लैंड रिकॉर्ड में ऐसे कई लोगों के नाम जोड़े गए थे। जो किसान ही नहीं थे। सरकारी जमीन और अन्य निजी जमीनों को भी अज्ञात लोगों के नाम करके भारी गड़बड़ियां की गई हैं।
इस मामले की जांच अब एसटीएफ कर रहा है इसमें सरकारी अमला, सॉफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारियों और फर्जी एंट्री करने वाले डाटा ऑपरेटरों पर एसटीएफ शिकंजा कसेगी इस गड़बड़ी में सॉफ़्टवेयर निर्माण से जुड़े कई अधिकारियों के शामिल होने की बात भी सामने आ रही है। प्रदेश में पिछले वर्षो में पिछले वर्षो में लैंड रिकार्ड में गड़बड़ी करके अरबों रुपयों को घोटाले की बात सामने आई है। बैंकों के अरबों रुपया इस घोटाले में फंस गये हैं।
भोपाल, ग्वालियर, मुरैना सहित कई जिलों के लैंड रिकॉर्ड की होगी जांच STF कर रही जांच
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