बैतूल, जिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती हुई महिला के उपचार में देरी का एक और मामला सामने आया है। आधी रात को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती हुई महिला का यदि समय पर उपचार हो जाता तो जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित होते। महिला के परिजनों का आरोप है कि रात भर से वह तड़प रही है यदि समय रहते सीजर करा लिया जाता तो उनके घर दीपावली पर खुशियों से भर जाता लेकिन अस्पताल में हुई लापरवाही के कारण त्योहार के पहले पूरे परिवार में मायूसी छा गई है। अब अस्पताल में महिला के मृत शिशु का नार्मल प्रसव कराने की तैयारी की जा रही है। जिसको लेकर भी परिवार के लोग आशंकित एवं डरे हुए है। आमला विकासखंड के ग्राम बिंदरई निवासी इमला पति कृष्णा यादव को दर्द उठने पर बीती रात 11 बजे पति एवं सास इंदिरा यादव ने प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। महिला को भर्ती कराने के बाद अस्तपाल में महज उसे ग्लूकोज चढ़ाया गया यह इंदिरा यादव ने चर्चा के दौरान बताया। इमला की सास इंदिरा ने बताया कि सुबह दस बजे तक उसकी बहू और गर्भस्थ शिशु ठीक था। बच्चा गर्भ में घूम भी रहा था लेकिन 11 बजे जब जांच की नर्स ने बताया कि बच्चा गर्भ में ही मर गया है। इंदिरा ने आरोप लगाया कि हम अस्पताल में बहू को इसलिए लेकर आए थे कि सुरक्षित डिलेवरी हो जाएगी लेकिन यहां 12 घंटे भर्ती रखने के बाद भी सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाया। यदि प्रसव में कोई कठिनाई थी तो डॉक्टर समय रहते सीजर कर सकते थे, लेकिन पूरी रात न तो प्रसव कराने को लेकर कोई गंभीर नजर आया और न ही कोई जांच ही की गई। इंदिरा ने गर्भस्थ शिशु की मौत के लिए अस्पताल के डॉक्टरों को ही दोषी ठहराया है।
अस्पताल ने किया शर्मसार डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भ में ही शिशु की मौत
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